DELHI BOOM BLAST SPECIAL REPORT
(संजीव ठाकुर)दिल्ली:Delhi Red Fort Blast 2025
देश की राजधानी दिल्ली के हृदय में स्थित ऐतिहासिक लाल किला सोमवार शाम एक तेज धमाके से दहल उठा। यह विस्फोट लाल किले से कुछ ही दूरी पर सड़क के किनारे खड़ी एक कार में हुआ। इस घटना में कई लोगों की मौत और कई अन्य गंभीर रूप से घायल होने की आशंका है। धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास खड़ी कई गाड़ियों के शीशे टूट गए और क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया,घटना के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस, एनएसजी और बम निरोधक स्क्वाड की टीम मौके पर पहुंच गई। क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया गया है और घायलों को नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। चश्मदीदों के अनुसार धमाके से पहले कार में संदिग्ध गतिविधि दिखाई दी थी,फरीदाबाद में बरामद विस्फोटक — क्या पहले से थी चेतावनी:हमले से चंद घंटों पहले ही हरियाणा के फरीदाबाद में भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद किया गया था। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों को और सतर्क होना चाहिए था, परन्तु राजधानी में ऐसा बड़ा धमाका हो जाना गंभीर सुरक्षा चूक को दर्शाता है,सवाल यह उठता है कि:क्या खुफिया एजेंसियों ने सही समय पर सूचना साझा नहीं की?
क्या पुलिस की सतर्कता पर्याप्त नहीं थी?क्या संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ाई नहीं गई?
आखिर जिम्मेदारी किसकी :एक ओर राजनीतिक दल इस मुद्दे पर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं,
लेकिन असल सवाल आम नागरिक पूछ रहा है —
उन निर्दोषों की मौत और चोट की जिम्मेदारी कौन लेगा?
राजधानी जैसे हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में धमाका होना इस बात का संकेत है कि, सुरक्षा तंत्र में कहीं न कहीं बहुत बड़ी कमी है, क्या प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियाँ जवाब देंगी?
विशेषज्ञों की राय है
Delhi Red Fort Blast 2025 में खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी रही,चेतावनी को हल्के में लिया गया
संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ी निगरानी नहीं थी,अब यह जांच का विषय है कि धमाका करने वालों ने,स्थानीय नेटवर्क की मदद ली या बाहर से आए, ज़िम्मेदारी तय करने की मांग,नागरिकों और सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि:सिर्फ अपराधी नहीं,संबंधित सुरक्षा अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
जब तक सख़्त कार्यवाही, कानूनी सुधार, और
सरकारी कर्मचारियों का वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन लागू नहीं होगा,तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे,घायलों के लिए मदद — परिवारों को न्याय चाहिए,पीड़ितों के परिवारों ने सरकार से मांग की है:त्वरित व उचित मुआवजा,बेहतर इलाज:निष्पक्ष जांच:दोषियों पर कड़ी कार्रवाई:लाल किले के पास धमाका — सिर्फ एक आतंकी वारदात नहीं,
बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
राजधानी के दिल में धमाके के बाद भी यदि तंत्र नहीं जागा,
तो यह केवल एक चेतावनी नहीं — खतरे की घंटी है।
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