एआईयू ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता निलंबित; दिल्ली बमकांड में जुड़े नामों पर बढ़ी जांच

“Graphic showing AIU suspending Al-Falah University, with bold text on the left and the university entrance gate on the right.”
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(संजीव ठाकुर) फरीदाबाद : भारतीय विश्वविद्यालय संघ (Association of Indian Universities – AIU) ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद (हरियाणा) की सदस्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी है।AIU suspends Al-Falah University, एआईयू की महासचिव डॉ. (श्रीमती) पंकज मित्तल द्वारा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) भुपिंदर कौर आनंद को भेजे गए आधिकारिक पत्र में कहा गया है कि विश्वविद्यालय अब ‘गुड स्टैंडिंग’ की स्थिति में नहीं माना जा सकता,पत्र के अनुसार, एआईयू ने स्पष्ट किया है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी अब एआईयू का नाम या लोगो किसी भी गतिविधि में प्रयोग नहीं कर सकेगी और विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट से भी एआईयू लोगो को तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए गए हैं,

इस कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय को लेकर एक और गंभीर मामला उभरकर सामने आया है। दिल्ली के लाल किले के पास हाल ही में हुए धमाके की जांच में सामने आई कुछ जानकारियों के अनुसार, अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ चिकित्सकों के नाम जांच एजेंसियों की रडार पर बताए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसियाँ इन डॉक्टरों के संबंध में सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं — हालांकि अब तक किसी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है,यह मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि डॉक्टर का पेशा लोगों की जान बचाने से जुड़ा होता है, और यदि किसी भी तरह ऐसे नाम इस गंभीर मामले में सामने आ रहे हैं तो यह न केवल चिकित्सा जगत बल्कि शिक्षण संस्थानों की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है,कानून व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी प्रकार की साजिश या सहयोग का प्रमाण मिलता है, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा खुलासा साबित हो सकता है। वहीं, स्थानीय सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया मांगी गई है, पर अब तक कोई बयान जारी नहीं किया गया है,इस बीच, AIU suspends Al-Falah University and AIU ने सभी सदस्य विश्वविद्यालयों और संस्थानों को भी इसकी प्रति भेजी है, ताकि भविष्य में किसी भी स्तर पर अल-फलाह यूनिवर्सिटी को एआईयू सदस्यता से संबंधित किसी लाभ का उपयोग न मिल सके,फिलहाल पुलिस, सुरक्षा एजेंसियां और उच्च शिक्षा विभाग इस पूरे प्रकरण पर नज़दीकी नज़र रखे हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला अब सिर्फ़ प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जांच के दायरे में और भी बड़े नाम आने की संभावना है।

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